Saturday, November 26, 2016

अच्छे दिन आने वाले हैं


पीएम ने नोटों की लगायी
शपथ जो ली वो निभायी
जनता ने कंधा मिलायी
अब लगे शामत सी आयी
एटीम में कतार पायी
बिन कैश धीरज गँवाई
आय बढ़ती नहीं रे भाई
टैक्स इन्फ्लेशन बड़ी री माई
मंदी जग में है छाई
मन को बस बहला दिया कह,
दिन बुरे जाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं।

किसी गली से गुजर रहा था
चौपाल के पास मेरे
कदम बस ठिठक गए
नोटों पर चर्चा चली थी
गरीबी भी बातों में निकली थी
बेरोजगारों की हालत बुरी थी
बिजली पानी न देखी सुनी थी
विकास कागज पे हुयी थी
पर एफ़एम-टीवी के विज्ञापन
कुछ हौसला दे रही कह,
दिन बुरे जाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं।

चलते चलते नुक्कड़ पहुंचा
एक झोपड़ के पास मेरे
कदम बस ठिठक गए
दीवाल झुकी टूटी हुयी थी
ऊपर छत भी नहीं थी
घर अँधेरे में था डूबा
बाबा ने ताड़ी पी रखी थी
भूखे बच्चे बिलख रहे थे
रसोई में रोटी नहीं थी
माँ उन्हें फुसला रही थी कह,
दिन बुरे जाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं।

मैं घर आया, भांग खाया
मदिरा पी, कश लगाया
होश को धकिया दिया
हवा को लतिया दिया
तकिये को मुक्किया दिया
खुद को कुछ बहका लिया
रो-हँसा, मन पगला लिया
फिर साँसों को गहरा लिया
निराशा को झुठला दिया
सपने नए सजा लिया कह,
दिन बुरे जाने वाले हैं, अब अच्छे दिन आने वाले हैं।

- अमिताभ रंजन झा

I support Demonitization through my article https://www.linkedin.com/pulse/living-cash-amitabh-r-jha?articleId=6203142094719160320
But now it's I a concern ....
Government should clean up this mess faster sooner.

हिंदी उर्दू के कविता, साहित्य, व्याकरण के पंडित का चरणवंदन और त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना!



2 comments:

  1. पौराणिक कथाएं (Pauranik Kathayen) - धार्मिक कथाएं - धार्मिक कहानियाँ - हिंदी

    ReplyDelete