Monday, January 26, 2009

आंतकवादी की माँ

A poem for terrorism...

आंतकवादी की माँ

मौत का सौदागर तू
करे आतंक से प्यार|
हिंसा का पुजारी
करे मजलूमों पे प्रहार||

कोई हो मजहब
तुझे क्या दरकार!
तू तो बस करता जा
मानव-संहार||

इंसानों के मांस लहू से
बुझाये भूख प्यास|
लाशों के ढेर पे बैठा
करे तू अहठास||

हैवानियत ईमान
कत्ल तेरे संस्कार|
मासूमो की किलकारी
नहीं तुझे स्वीकार||

मेरे जिगर के टुकड़े तुने
जिगर कितने टुकड़े किये|
मेरी नजर के उजाले तुने
ऑंखें कितने सुने किये||

मेरे घर के दीपक तुने
कितने घरों के दीप बुझाये|
मै रोऊ पछताऊ हर पल
तुने ऐसे दिन दिखलाये||

आहत हु तुमसे
किया ममता का अपमान|
किसी माँ के कोख से
न जन्मे ऐसी संतान||

हर भूले राही से
करूँ मैं फ़रियाद|
घर लौट जा तू
करे माँ तुझको याद||

- अमिताभ रंजन झा

Love them who love you!
Live with them always!!
Violence is a crime!

Poems dedicated to mother:

माँ मुझको कलेजे से लगाये रखना

माँ तू याद आती है

हाड़ मांस का पुतला